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HECI Draft Bill 2018 Letter to MPs – Hindi

1) Copy this statewise list of MPs from Bihar, Jharkhand, Madhya Pradesh, Uttar Pradesh, Rajasthan, and Haryana. You can choose your state, or email them all.

Bihar:

tariq.anwar@sansad.nic.in,
kaushalendra.k@sansad.nic.in,
santosh.kumar19@sansad.nic.in,
shailesh.kumar19@sansad.nic.in,
ranjeet.ranjan19@sansad.nic.in,
jpnarayan.yadav@sansad.nic.in

Jharkhand:

shisoren@sansad.nic.in,
vijayhansdak@gmail.com

Madhya Pradesh

jyotiraditya.scindia@sansad.nic.in,
office.scindia@yahoo.com,
knshikarpur@gmail.com

Uttar Pradesh

office@rahulgandhi.in,
officeanupriyapatel@gmail.com,
nagendrapratapsingh0999@gmail.com,
kuwarharivansh.singh@sansad.nic.in,
yadavakshay@yahoo.com,
d.yadav@sansad.nic.in,
dimpleyadav78@gmail.com,
mulayamsingh.yadav@sansad.nic.in,
yadavteju@gmail.com

Rajasthan

raghusharma_2525@yahoo.in

Haryana

charanjeet.rori@sansad.nic.in
office@deepender.in
dchautala@gmail.com

2) Paste in the “to” field of your email client.

3) In the “subject” field, copy/paste: “REQUEST TO OPPOSE HECI DRAFT BILL 2018”

4) In the body of the text, copy/paste the following:

सांसद महोदय,

हम आपको इस आशा के साथ लिख रहे हैं की आप संसद के मानसून सत्र में पेश होने वाले Higher Education Commission of India (HECI) विधेयक 2018 का विरोध करेंगे, और देश के विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों की स्वायत्ता और अस्तित्व की रक्षा करेंगे.

प्रस्तावित विधेयक University Grant Commission Act (1956) को भी निरस्त कर देगा. UGC 1956 से अस्तित्व में है और इसे 3 महीने में आकस्मात समाप्त कर देना उचित कदम नहीं है. इस विषय में शिक्षकों, छात्रों एवं उच्च शिक्षा से जुड़े अन्य लोगो से कोई चर्चा या विमर्श नहीं हुआ है. राज्य सरकारों को भी विधेयक से जुडी समस्याओं पर आपने पक्ष रखने का पर्याप्त समय नहीं दिया गया है.

इस विधेयक में कई खामियां हैं और इसका हमारी उच्च शिक्षा प्रणाली पर बेहद नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। विधेयक का एक प्रारूप 27 जून 2018 को सुझावों के लिए आम किया गया था. महज तीन हफ्तों के भीतर आम जान मानस और इस विषय से जुड़े लोगो ने इस विधेयक की कमियों और खामियों के खिलाफ विरोध दर्ज करते हुए 7529 प्रतिक्रियाएं भेजी. इतने कम समय में इतनी प्रतिक्रियां ये सन्देश देती हैं की इस विधेयक को संसद में पेश करने से पहले इसपर व्यापक चर्चा और विमर्श करने की ज़रुरत हैं. मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इन प्रतिक्रियाओं को स्वीकार किया है, पर इसके अलावा चर्चा या विमर्श का कोई भी जनवादी कदम नहीं उठाया है. हमे ज्ञात हुआ है की मंत्रालय ने विधेयक में कुछ बदलाव किये हैं, पर इस परिवर्तन की जानकारी आम किये बिना सरकार ने ये विधेयक संसद के मानसून सत्र में पेश करने का निर्णय लिया है. जिन लोगो ने इस अहम् मुद्दे पर गंभीर प्रतिक्रियाएं भेजी हैं, उन्हें विधेयक में किये गए परिवर्तनों के सन्दर्भ में अंधेरे में रखा गया है। शिक्षकों, छात्रों और संगठनो की प्रमुख मांग इस विधेयक को ख़ारिज कर UGC को बने रहने देने की है. परन्तु सरकार की मंशा लोकतांत्रिक मत को दरकिनार कर विधेयक को जल्दबाज़ी में पारित करने की लग रही है।

राष्ट्र स्तरीय छात्र और शिक्षक संगठनो, एवं अन्य लोगों ने मीडिया के जरिये इस विधेयक की आलोचना की है। इसका संग्रह देखने के लिए ये लिंक देखें :
https://betteruniversities.in/2018/07/23/heci-draft-bill-2018-responses/

इस विधेयक से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं :
1. ये विधेयक सारी वित्तीय ताकतें UGC के हाथों से हटा कर MHRD के हाथों में दे देगा. यह विधेयक मानव संसाधन विकास मंत्रालय से या किसी अन्य संस्थान को अनुदान वितरण के लिए जिम्मेदार बनाता है. यह अनुदान आवंटन को कम पारदर्शी , अधिक एकपक्षीय एवं राजनैतिक मनमानी का शिकार बनाएगा क्यूंकि इस विधेयक के अनुसार HECI के सुझाव बाध्यकारी नहीं हैं. यह विधेयक निति निर्माण एवं अनुदान वितरण को विभक्त कर रहा है, और इस कारण शैक्षणिक संस्थान की राजभक्ति के अनुसार, सरकारी कोष उन्हें पुरस्कृत या दण्डित कर सकता है. यह संस्थानों के विभिन्न स्तरों (केंद्रीय और राजकीय, सामान्य और पेशेवर, वैज्ञानिक और तकनीकी, अनुसंधान और व्यावसायिक, महानगरीय और ग्रामीण, आदि) के बीच पदानुक्रमों को भी बढ़ाएगा।

2. HECI की संरचना केंद्र सरकार के अधिकारीयों द्वारा उच्च शिक्षा के अधिकरण का संकेत देती है. आयोग के 12 सदस्यों में से 10 या तो केंद्र सरकार के अधिकारी हैं या विभिन्न सरकारी कार्यालयों में नियुक्त हैं।शिक्षकों की संख्या कम होकर दो कर दी गयी है जोकि एक ऐसे आयोग में पूर्णतः अस्वीकार्य है जो देश में उच्च शिक्षा के मानक और गुणवत्ता को निर्धारित करेगी। आयोग की संरचना देश की विविधता को भी प्रतिबिंबित नहीं करती है. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी, महिलाओं, ट्रांसपर्सन, विकलांग व्यक्तियों और अल्पसंख्यकों जैसे समूहों के प्रतिनिधित्व का कोई प्रावधान नहीं है.

3. विधेयक के विनियामक प्रावधान जैसे प्राधिकरण, वर्गीकृत स्वायत्तता, और संस्थानों को बंद करने के आदेश देने का ताकत एक अत्यंत केंद्रीकृत शासन स्थापित करेंगे जो अराजकता, समय और संसाधनों की बर्बादी, शिक्षकों के लिए अधिक नौकरी असुरक्षा, भारी शुल्क वृद्धि, और निजीकरण का कारण बनेंगे। इससे छात्रों और उनके परिवारों को बड़ी परेशानी और चिंता होगी। अंततः, यह अत्यंत चिंताजनक है की HECI विधेयक को पिछले सभी कानूनों पर ओवरराइडिंग प्रभाव दिया गया है, जिससे देश के फेडरल चरित्र के लिए गंभीर परिणाम होंगे।

4. उच्च शिक्षा के मानकों की स्थापना के संबंध में ‘सब के लिए एक आकार’ मॉडल कभी सफल नहीं हो सकता है। इस देश की विविधता और समाज के विभिन्न वर्गों में विस्तार कर रही उच्च शिक्षा को ध्यान में रखते हुए हमें ऐसे आयोग की ज़रूरत है जो सामाजिक रूप से उत्तरदायी हो और सामाजिक न्याय की दिशा की ओर अग्रसर करे. HECI विधेयक उच्च शिक्षा के विस्तार और इक्विटी में वृद्धि करने हेतु एक लचीले आयोग को स्थापित नहीं करता है।

5. HECI विधेयक उच्च शिक्षा के संस्थानों की स्वायत्तता को समाप्त करता है।आयोग द्वारा किए गए मानकों से संबंधित प्रत्येक विनियमन को केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति होनी चाहिए। यह उच्च शिक्षा संस्थानों में भाषण, विचार, और असंतोष की अभिव्यक्ति की आजादी को नष्ट करने के साधनों के रूप में नियमों के उपयोग को प्रोत्साहित करेगा। मजबूर आज्ञाकारिता का वातावरण समाज में या शैक्षणिक संस्थानों की स्थिति में सार्थक सुधार को प्रोत्साहित नहीं करता।

हमें उम्मीद है कि आप संसद के समक्ष हमारी राय पेश करने और विधेयक के खिलाफ बहस में हमें बात रखने के लिए सहमति देंगे। हम आपसे अनुरोध करते हैं कि विधेयक को Standing Committee को संदर्भित किया जाए ताकि शिक्षकों, छात्रों और शिक्षाविदों को अपने विचार पेश करने का पर्याप्त अवसर मिल सके।

5) Press SEND

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